शासन की योजनाओं का लाभ लेकर किस तरह खेती की तस्वीर बदली जा सकती है इसकी एक मिसाल जबलपुर जिले के सिहोरा विकासखंड के ग्राम भदम के युवा कृषक 36 वर्षीय विपिन तिवारी ने पेश की है। कंप्यूटर साइंस में बीएससी विपिन तिवारी ने न केवल अपनी आठ एकड़ पैतृक कृषि भूमि को आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर मॉडल फार्म के रूप में विकसित किया, बल्कि 2024-25 में शासन की कस्टम हायरिंग सेंटर योजना का लाभ लेकर आधुनिक कृषि यंत्रों का केंद्र भी स्थापित किया है।
विपिन के कस्टम हायरिंग सेंटर से भदम, खजरी, घुटना और पौड़ी सहित आसपास के गांवों के किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र किराए पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, इससे क्षेत्र में सुपर सीड ड्रिल से नरवाई जलाए बिना समय पर सीधी बुवाई को बढ़ावा मिल रहा है, जबकि स्ट्रॉ रीपर से फसल अवशेषों का उपयोग भूसा के रूप में किया जा रहा है।
विपिन के कस्टम हायरिंग सेंटर से सुपर सीड ड्रिल के अलावा ट्रेक्टर, पावर स्प्रे पंप और कल्टीवेटर जैसे आधुनिक कृषि यंत्र भी किफायती किराए पर किसानों को उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इससे क्षेत्र के ऐसे छोटे और सिमांत किसानों को अधिक लाभ मिल रहा है जो आधुनिक और महंगे कृषि उपकरण खरीद नहीं सकते।
सरकारी योजना से शुरू किया कस्टम हायरिंग सेंटर-
विपिन तिवारी ने करीब 25 लाख रुपये की लागत से सीड ड्रिल और स्ट्रॉ रीपर, लेज़र लैंड लेवलर, रोटावेटर, कल्टीवेटर जैसे आधुनिक कृषि यंत्र खरीदे। इस परियोजना के लिए कृषि अभियांत्रिकी विभाग से उन्हें 7 लाख 92 हजार रुपये का अनुदान भी मिला है। इसी सहयोग से उन्होंने गांव में कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना की, जहां से किसान किराये पर आधुनिक कृषि यंत्र लेकर खेती के कार्य आसानी से कर रहे हैं।
विपिन तिवारी अपने खेत से प्रतिवर्ष करीब 10 से 11 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। वहीं कस्टम हायरिंग सेंटर से भी 10 से 11 लाख रुपये का वार्षिक टर्नओवर तथा संचालन खर्च निकालने के बाद उन्हें करीब 4 से 4.50 लाख रुपये का शुद्ध वार्षिक लाभ प्राप्त हो रहा है। विपिन तिवारी का कृषि यंत्रीकरण से आत्मनिर्भरता और ग्रामीण रोजगार का यह मॉडल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी उपयोगी साबित हो रहा है।
