क्वार्टर फाइनल में जीत के बाद सुचिका - फोटो : Twitter जूडो में तेजी से बनाई पहचान करीब 2000 में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में जूडो की क्लासेस शुरू कीं। कुछ ही समय में उन्होंने आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने शुरू कर दिए और कुछ वर्षों में जूनियर राष्ट्रीय स्तर पर भी पदक हासिल किया।
इसके बाद वह जूडो में आठ बार की राष्ट्रीय चैंपियन बनीं। मौके मिले, लेकिन आर्थिक मुश्किलें भी रहीं 2018 में सुचिका 48 किलोग्राम वर्ग में एशियन गेम्स के लिए दावेदार थीं, लेकिन भारत ने इस वर्ग में खिलाड़ी नहीं उतारा।
उनके पति कपिल हुड्डा के मुताबिक, उस समय सुचिका का करियर अपने चरम पर था। इसके अगले साल उन्होंने कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। हालांकि, उनके करियर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक आर्थिक समस्या रही।
लंबे समय तक उन्हें पर्याप्त आर्थिक मदद नहीं मिली और जूडो की रैंकिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का खर्च परिवार को खुद उठाना पड़ता था। कोचिंग, ट्रेनिंग, डाइट और सप्लीमेंट्स का खर्च भी बढ़ता गया।
कपिल हुड्डा के मुताबिक, उन्होंने सुचिका के खेल करियर को जारी रखने के लिए अपनी बचत लगाई और कर्ज भी लिया। उन्होंने बताया कि उन पर करीब 20 लाख रुपये का कर्ज लंबित है। लोकप्रिय भी हैं सुचिका जूडो में सफलता के साथ-साथ सुचिका तरियाल को लोकप्रियता भी मिली।
उन्हें भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें चार वर्ल्ड चैंपियनशिप और 30 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने के साथ-साथ एथलेटिक उत्कृष्टता, युवाओं पर प्रभाव और महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश करने के लिए मिला।
तरियाल एमटीवी रोडीज और प्राइम वीडियो के 'इंडियाज अल्टीमेट वॉरियर' जैसे लोकप्रिय टीवी शो में भी नजर आ चुकी हैं। जूडो से जू-जित्सु और फिर एमएमए जूडो के बाद सुचिका ने जू-जित्सु का रुख किया और 2024 में जेजेआईएफ जू-जित्सु विश्व चैंपियनशिप में एडल्ट्स जू-जित्सु कॉन्टैक्ट महिला 63 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।
उन्होंने 2017 में एमएमए में डेब्यू किया था और जीत के साथ शुरुआत की। हालांकि, इसके बाद उन्होंने सात साल तक एमएमए से दूरी बनाए रखी और जूडो तथा जू-जित्सु में प्रतिस्पर्धा जारी रखी। नवंबर 2024 में उन्होंने ब्रेव कॉम्बैट फेडरेशन के साथ करार किया और दिसंबर 2024 में बहरीन में ब्रेव सीएफ 92 से पेशेवर एमएमए में वापसी की, जहां उन्होंने जीत दर्ज की।
सुचिका ने एमएमए को अपने लिए मार्शल आर्ट्स का सबसे संपूर्ण स्तर बताया है। उन्होंने कहा, 'जूडो ने मुझे एमएमए के लिए तैयार किया। जूडो की वजह से मेरी ग्राउंड फाइटिंग और ग्रैपलिंग मजबूत थी।
मुझे सिर्फ स्टैंडिंग गेम और स्ट्राइकिंग सीखनी थी।' .ads-row{display:flex;gap:10px;flex-wrap:wrap;} विज्ञापन if(typeof is_mobile !='undefined' && !is_mobile()){ googletag.cmd.push(function() { googletag.display('div-gpt-ad-1779088166995-1'); }); } if(typeof is_mobile !='undefined' && !is_mobile()){ googletag.cmd.push(function() { googletag.display('div-gpt-ad-1779088166995-2'); }); } पदक से कुछ सेकंड दूर रह गईं 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में सुचिका पदक के बेहद करीब पहुंची थीं, लेकिन कांस्य पदक के मुकाबले के आखिरी सेकेंड में हार गईं।
यह हार उनके लिए इसलिए भी ज्यादा मुश्किल थी क्योंकि एक पदक उनके लिए सरकारी पुरस्कारों और आर्थिक स्थिति में सुधार का रास्ता खोल सकता था। उनके पति कपिल हुड्डा के मुताबिक, इस करीबी हार का सुचिका पर काफी असर पड़ा और वह लंबे समय तक इस नतीजे के बारे में सोचती रहीं।
बहरहाल यह सुचिका का दूसरा एशियन गेम्स है। 2022 हांगझोउ एशियाड में उन्होंने कुराश में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उस समय उन्हें पदक नहीं मिला था। अब चार साल बाद वह एमएमए में भारत के लिए पदक पक्का कर चुकी हैं।
सुचिका ने हांगझोऊ के अनुभव को याद करते हुए कहा था, 'जिंदगी ने मुझे एशियन गेम्स में दूसरा मौका दिया है। हांगझोउ में चीजें मेरी उम्मीद के मुताबिक नहीं हुईं। इस बार मैं एमएमए के लिए पूरी तरह तैयार हूं।'
मुख्य बातें
- क्वार्टर फाइनल में जीत के बाद सुचिका - फोटो : Twitter जूडो में तेजी से बनाई पहचान करीब 2000 में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में जूडो…
- कुछ ही समय में उन्होंने आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने शुरू कर दिए और कुछ वर्षों में जूनियर राष्ट्रीय स्तर पर भी पदक हासिल किया।
- इसके बाद वह जूडो में आठ बार की राष्ट्रीय चैंपियन बनीं।
स्रोत और संदर्भ
- अमर उजाला · कौन हैं सुचिका तरियाल?: एशियन गेम्स 2026 में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में रचा इतिहास; भारत को दिलाया कांस्य पदक ↗21 सितंबर 2026
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 21 सितंबर 2026।


